महाराज पृथु के सौ अश्वमेध यज्ञ।

पिछली कहानी से आगे – राजा पृथु ने सौ अश्वमेध- यज्ञों की दीक्षा ली, यह देख कर भगवान इंद्र ने सोचा कि इस प्रकार तो…

पृथु का पृथ्वी पर कुपित होना और पृथ्वी द्वारा उनकी स्तुति करना और पृथ्वी का दोहन।

पिछली कहानी से आगे – जब वंदीजनों ने महाराज पृथु के गुण और कर्मों का बखान करके उनकी प्रशंसा की, तब उन्होंने भी उन्हें मनचाही…

वंदीजन द्वारा महाराज पृथु की स्तुति।

पिछली कहानी से आगे – जब पृथु ने अपने स्तुति करने से मना किया और श्री हरि की स्तुति करने को कहा, तब सूत आदि…

महाराज पृथु का आविर्भाव और राज्याभिषेक।

ऋषियों के द्वारा अत्याचारी वेन को मारने के बाद अंग का वंश समाप्त न हो जाए, इसलिए उसकी जांघ से उत्पन्न पुत्र निषाद बहुत हिंसा…

राजा वेन की कथा।

श्रीमैत्रेयजी कहतेहैं- वीरवर विदुरजी! सभी लोकों की कुशल चाहने वाले भृगु आदि मुनियों ने देखा कि अंग के चले जाने से अब पृथ्वी की रक्षा…

राजा ध्रुव के वंश का वर्णन तथा राजा अंग का चरित्र।

पिछली कहानी से आगे – श्रीमैत्रेय मुनि के मुख से ध्रुवजी के विष्णुपद पर आरूढ़ होने का वृत्तांत सुनकर, विदुरजी के हृदय में भगवान विष्णु…

ध्रुव जी को कुबेर का वरदान और विष्णु लोक की प्राप्ति।

पिछली कहानी से आगे – अपने भाई उत्तम का यक्षों द्वारा मारे जाने के बाद, ध्रुव ने यक्षों से युद्ध किया। यक्षों का बहुत ज्यादा…

मनु द्वारा ध्रुवजी को यक्षों के साथ युद्ध बंद करने के लिए समझाना।

आगे का भाग- ऋषियों का यह कथन कि श्री नारायण का नाम ही ऐसा है जिसके सुनने और कीर्तन करने मात्र से ही शत्रुओं का…

ध्रुव के भाई उत्तम का मारा जाना और ध्रुव का यक्षों के साथ युद्ध।

आगे का भाग– ध्रुव ने प्रजापति शिशुमार की पुत्री भ्रमि के साथ विवाह किया, इससे उनके कल्प और वत्सर नाम के दो पुत्र हुए। महाबली…

ध्रुव का वन-गमन

महाराज मनु और महारानी शतरूपा के दो पुत्र थे प्रियव्रत और उत्तानपाद। भगवान वासुदेव की कला से उत्पन्न होने के कारण ये दोनों संसार की…